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ब्रांडिंग के 7 सिद्धांत क्या हैं? Branding principles for health & wellness coaches

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ब्रांडिंग का सिद्धांत (branding principles) क्या होता है? इससे हमारे बिज़नेस को कितना फायदा होगा? और यदि हम इन सिद्धांत को भूलते है तो क्या होगा? 

सीधी बात है – क्या आप अपने health और wellness के बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं? क्या आप अपने बिजनेस में ज्यादा से ज्यादा सेल्स चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि आपके क्लाइंट आपसे बार-बार प्रोडक्ट खरीदे – आपकी कोचिंग को यूज करें और अपनी लाइफ, बॉडी और दिमाग बेहतर बनाएं? यदि हां तो इसके लिए हमें ब्रांडिंग के 7 सिद्धांतों को समझने की आवश्यकता है जिसकी मदद से हम अपने बिजनेस को एक ब्रांड में बदलकर अपने बिजनेस को बड़ा कर सकते हैं और अपने क्लाइंट्स को  हमारे  बिजनेस का एक एडवोकेट बना सकते हैं – जो अपने साथ और लोगों को भी जड़ता है – आपके बिज़नेस के बारे में बात करता है.

ब्रांडिंग का सिद्धांत

Consistency – one of the most ignored branding principles

क्या आप जानते है की research की अनुसार, clients के दिमाग में हमारा बिज़नेस एक व्यक्ति की तरह होता है? हर बिजनेस की, हर ब्रांड की, एक पर्सनालिटी होती है?

जब हमारा बिज़नेस और ब्रांड उस पर्सनैलिटी को हर वक्त दर्शाता है तब  हमारे बिजनेस को क्लाइंट के दिमाग में एक छोटी सी जगह मिलती है। उसको लगने लगता है कि अगर मुझे इस प्रॉब्लम को सॉल्व करना है तो मुझे इस बिजनेस के पास जाना होगा। 

कंसिस्टेंसी बनाने के लिए हमें सिर्फ logo या tagline पर ही काम नहीं करना — हमें बिजनेस values के ऊपर भी काम करना है. इसीलिए हम जितना भी कंटेंट बनाए उसमें एक सी पर्सनैलिटी दिखाएं। तो जब आप अपनी ब्रांड के कम्युनिकेशन में एक कंसिस्टेंट मैसेजिंग रखते हैं तो आपकी ब्रांड एक बेहतर बैंड होती है.

Simplicity – ये नहीं तो sales नहीं

बहुत सारे हेल्थ और वैलनेस coaches जब अपने कोचिंग के बारे में और अपने प्रोडक्ट के बारे में बात करते हैं तो चीजें बहुत कंपलेक्स कर देते हैं.

केमिकल रिएक्शन, सैक्रोफेन, प्लासटीसीटी — ये सब “jargons” code language के जैसे है. इससे होता यह है की एक नॉर्मल ग्राहक से हमारा संपर्क टूट जाता है. अगर आपको सेल्स बढ़ानी है, अपनी ब्रांड को लोगों तक पहुंचाना है तो आपको हर मैसेज जैसे की आपकी वेबसाइट, ईमेल, वेबीनार और वर्कशॉप – सब जगह आपको सिंपल भाषा में बात करनी होगी। इससे क्या होगा?  इससे हम एक आम इंसान के लिए एक जानकार – एक expert – बन जाते हैं. जिससे वह हम पर ट्रस्ट करने लगता है. 

Difference – मुश्किल पर impossible नहीं

आज मार्केट में बहुत सारी स्टार्टअप्स है. एक अनुमान के अनुसार 2016 में 485 स्टार्टअप थी और 2023 में 99 हज़ार के लगभग हो गई. तो बहुत सारे ग्राहकों को यह अंदाजा ही नहीं है कि उसके लिए क्या अच्छा है. जब आप इस समुद्र से अलग दिखते हैं – अलग बात करते हैं तब ग्राहक के दिमाग में आप एक जगह बनाते हैं.

यह काम आपकी वेबसाइट, आपके webinars, आपका कंटेंट — आपको मार्केट में अलग बनाता है. और लोगों को एक कारण देता है कि वह आपके प्रोडक्ट खरीदें। यह एक बहुत मुश्किल कार्य भी है लेकिन यह बहुत जरूरी भी है।  अगर आपको अपना बिजनेस बढ़ाना है तो इसके लिए आपको जो आपकी ideal audience है उसको टारगेट करना होगा। 

सिर्फ उन्हीं को पहचान कर उनके लिए कंटेंट बनाना होगा।  इससे होगा क्या?  इससे आपकी brand डायरेक्ट उन लोगों तक पहुंचेगी। बजाय कि आप दूसरे लोगों पर अपना मार्केटिंग का बजट बर्बाद करें आपका मार्केटिंग का पैसा आपको ज्यादा रिटर्न दिलाएगा…

और क्लाइंट भी। Right?

Relevance – cold audience जीतने का अहम् सिद्धांत

क्या आपने ऐसी ads देखी है — “क्या आपके टूथपेस्ट में नमक है”. और आजकल एक नई ad चल रही है “टूथपेस्ट में मल्टीविटामिंस”. हो सकता है कि आपको यह हास्यास्पद लगे क्योंकि आप एक हेल्थ फील्ड के जानकर  हैं।  आपको पता है की इन चीजों से दातों का कोई लेना देना नहीं है। 

लेकिन ज्यादातर लोग इन चीजों को नहीं समझ पाते। नमक और मल्टीविटामिन का हो सकता है की दातों पर थोड़ा-बहुत असर पड़ता हो पर सबसे असरदार है उनकी जीवनशैली उनका रहन-सहन और खान-पान।  इसीलिए आपको अपने मार्केटिंग में और ब्रांडिंग में अपने मैसेज को ज्यादा से ज्यादा अपनी टारगेट ऑडियंस के लिए बनना है।

अपने मैसेज को जितना आप प्रासंगिक रखेंगे उतने ही बेहतर आप अपने ऑडियंस से कनेक्ट कर पाएंगे  क्योंकि हमारा मकसद यहां पर ऑडियंस के साथ connect करना है। 

Emotions – secret of sales & marketing

ब्रांडिंग का एक ही मकसद है और वह है ऑडियंस के साथ में एक कनेक्शन बैठाना।  उनके इमोशंस को छूना। जितना ज्यादा आप उनसे गहरा संबंध बनाएंगे उतना ही आपके प्रोडक्ट वो खरीदेंगे क्योंकि सेल हमेशा इमोशनल होती है। 

आपकी टारगेट ऑडियंस  चाहे कोई भी हो चाहे वह न्यूक्लियर साइंटिस्ट ही क्यों ना हो लेकिन जब बात क्रेडिट कार्ड से रुपया निकालने की हो तो इमोशंस काम आते हैं। 

हो सकता है बाद में हम उसको facts के जरिए justify करें। लेकिन sales हमेशा इमोशनल होती है। तो अपने प्रोडक्ट को, अपनी सेल्स को, और अपनी ब्रांडिंग को जितना इमोशनल टच आप देंगे उतनी ही ज्यादा आपकी brand सक्सेसफुल होगी। इसमें आप storytelling का भी यूज कर सकते हैं. जितनी बेहतर आपकी स्टोरीज होगी उतना ही ज्यादा स्ट्रांग्ली लोग आप से कनेक्ट करेंगे। 

Flexibility – लम्बी चलने वाली brands  की पहचान

मार्केट की कंडीशन और लोगों की preference हमेशा चेंज होती रहती है। लोग healthy होना चाहते हैं फिट होना चाहते हैं. कुछ लोगों के पास में जिम के लिए टाइम होता है तो कुछ लोगों के पास में टाइम होते हुए भी उनको नजर नहीं आता। लॉकडाउन के बाद बहुत लोग अपने हेल्थ को लेकर जागरूक हो गए हैं और नए-नए प्रोडक्ट्स ट्राई करने के लिए ओपन हो गए हैं। 

पहले लोग ऑनलाइन सामान लेना पसंद नहीं करते थे लेकिन अब जैसे-जैसे ज्यादा स्टार्टअप्स देश दुनिया में आ गए हैं वैसे ही लोग ऑनलाइन खरीदारी पसंद करते हैं। यही नहीं ऑनलाइन वीडियोस सस्ते mobile-data की वजह से बहुत प्रचलित हो गई है। अब लोग पढ़ना कम और यूट्यूब देखना ज्यादा पसंद करते हैं यहीं पर आपकी ब्रांड की फ्लैक्सिबिलिटी काम आती है। 

आप अपनी brand को जितना मार्केट के अनुकूल रखेंगे उतना ही मार्केट में बने रहेंगे।

Loyality – sirf clients नहीं advocates बनाए

हर ब्रांड का सिर्फ एक मकसद होता है कि लोग हमारे पास ज्यादा से ज्यादा आए और हमारे प्रोडक्ट ज्यादा से ज्यादा खरीदें। और बार-बार खरीदें। एक स्ट्रांग बैंड के पास सॉन्ग प्रोडक्ट भी होता है और एक कम्युनिटी भी होती है – जो लोगों को जोड़ें रखती है। फर्स्ट टाइम यदि कोई खरीदता है तो वह आपकी कम्युनिटी से जुड़ता नहीं है वह चीजें सिर्फ बाहर से देखता है।  जैसे ही वह दूसरे लोगों से मिलकर अपना एक ओपिनियन बनाता है और समझता है – तब वह दूसरे लोगों को भी आपके प्रोडक्ट से जोड़ता है। 

तो प्रोडक्ट अच्छा बनाना काफी नहीं है हमें कम्युनिटी भी बनानी है।  और यह बात हेल्थ और wellness के फील्ड में बहुत उपयोगी है क्योंकि लाइफ स्टाइल चेंज करना एक बहुत मुश्किल कार्य है। पर जब ग्राहक को एक कम्युनिटी मिलती है – यह समझ मिलती है कि किस तरीके से उसे आगे बढ़ना है तब वह अपनी लाइफ भी चेंज करता है। और दूसरे लोगों को भी आपकी brand से जोड़ता है। 

मुख्य बात ये की हर ब्रांड के पीछे उसके founders की पर्सनालिटी होती है। अपनी ब्रांड के पीछे आप है। आपकी एक अलग पर्सनैलिटी है और आपके बिजनेस में भी कहीं ना कहीं वह पर्सनैलिटी रिफ्लेक्ट होती है। इसके लिए personal brand बनाना और भी जरुरी हो जाता है। अगर आपको पर्सनल ब्रांड बनाना है तो यहां पर क्लिक करें

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